सोमवार, 29 अप्रैल 2019

ख़त हवा में अध्-जले जलते रहे ...


मील के पत्थर थे ये जलते रहे
कुछ मुसफ़िर यूँ खड़े जलते रहे

पास आ, खुद को निहारा, हो गया
फुरसतों में आईने जलते रहे

कश लिया, एड़ी से रगड़ा ... पर नहीं
“बट” तुम्हारी याद के जलते रहे

मग तेरा, कौफी तेरी, यादें तेरी
होठ थे जलते रहे, जलते रहे

रोज़ के झगड़े, उधर तुम, मैं इधर 
मौन से कुछ रास्ते जलते रहे

प्रेम टपका, तब हुए ना, टस-से-मस 
नफरतों की धूप मे जलते रहे

गल गया जीवन, बिमारी लग गई
शामियाने शान से जलते रहे

लफ्ज़ ले कर उड़ गईं कुछ तितलियाँ
ख़त हवा में अध्-जले जलते रहे

43 टिप्‍पणियां:

  1. लफ्ज़ ले कर उड़ गईं कुछ तितलियाँ
    ख़त हवा में अध्-जले जलते रहे

    बहुत खूब।

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  2. प्रेम टपका, तब हुए ना, टस-से-मस
    नफरतों की धूप मे जलते रह बेहतरीन प्रस्तुति

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  3. लफ्ज़ ले कर उड़ गई कुछ तितलियाँ
    ख़त हवा में अध-जले जलते रहे

    नायाब पंक्तियाँ
    समग्र बेहतरीन

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  4. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 30 अप्रैल 2019 को साझा की गई है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  5. लफ्ज़ दर लफ्ज़ खिल रहे..
    बेहतरीन।

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (30-04-2019) को "छल-बल के हथियार" (चर्चा अंक-3321) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  8. कश लिया, एड़ी से रगड़ा ... पर नहीं
    “बट” तुम्हारी याद के जलते रहे
    ग़ज़ब की गज़ल ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है.........बेहतरीन

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  9. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 29/04/2019 की बुलेटिन, " अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस - 29 अप्रैल - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  10. बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल. मुझे यह शे'र सब से अधिक सुंदर लगा-

    मग तेरा, कौफी तेरी, यादें तेरी
    होठ थे जलते रहे, जलते रहे

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  11. खत हवा मे अधजले जलते रहे, कविता बहुत ही सुंदर है। एक एक शब्द दिल को छू गया। अच्छी रचना के लिये आपका धन्यवाद।

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  12. आवश्यक सूचना :

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  13. लफ्ज़ ले कर उड़ गईं कुछ तितलियाँ
    ख़त हवा में अध्-जले जलते रहे
    बहुत शानदार अलफ़ाज़ ....आप जैसे गुणवान गज़लगो को और कुछ कहना सूरज को दिया दिखाने जैसा होगा

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  14. जी नमस्ते,

    आपकी लिखी रचना बुधवार १५ मई २०१९ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  15. वक़्त रहते प्यार का इकरार कर,
    फिर न कहना, हाथ हम मलते रहे.

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  16. लफ्ज़ ले कर उड़ गईं कुछ तितलियाँ
    ख़त हवा में अध्-जले जलते रहे

    बहुत खूब ,लाज़बाब ,सादर नमस्कार

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  17. लफ्ज़ ले कर उड़ गईं कुछ तितलियाँ
    ख़त हवा में अध्-जले जलते रहे
    बहुत ही सराहनीय गज़ल आदरणीय दिगम्बर जी | ' जलते ' रहे का क्या खूब इस्तेमाल कियाहै आपने | सचमुच कुछ भी कहूं कम होगा सराहना के लिए | हार्दिक शुभकामनायें और आभार इस मधुर रचना के लिए |

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  18. लफ्ज़ ले कर उड़ गईं कुछ तितलियाँ
    ख़त हवा में अध्-जले जलते रहे...बहुत खूब

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है