बुधवार, 12 जून 2019

मुहब्बत की है बस इतनी कहानी ...

अपने शहर की खुशबू भी कम नहीं होती ... अभी लौटा हूँ अपने कर्म क्षेत्र ... एक गज़ल आपके नाम ...

झुकी पलकें दुपट्टा आसमानी
कहीं खिलती तो होगी रात रानी

वजह क्या है तेरी खुशबू की जाना 
कोई परफ्यूम या चिट्ठी पुरानी

मिटा सकते नहीं पन्नों से लेकिन  
दिलों से कुछ खरोंचे हैं मिटानी

लड़ाई, दोस्ती फिर प्रेम पल पल
हमारी रोज़ की है जिंदगानी

अभी से सो रही हो थक गईं क्या
अभी तो ढेर बातें हैं बतानी

यहाँ राधा है मीरा कृष्ण भी है
यहाँ की शाम है कितनी सुहानी

हंसी के बीच दांतों का नज़ारा
मुहब्बत की है बस इतनी कहानी

44 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक चर्चा मंच पर चर्चा - 3365 दिया जाएगा

    धन्यवाद

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 12/06/2019 की बुलेटिन, " १२ जून - विश्व बालश्रम दिवस और हम - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. खूबसूरत रचना। आनंद आ गया।

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (14-06-2019) को "काला अक्षर भैंस बराबर" (चर्चा अंक- 3366) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. बहुत ही सुंदर रचना,नासवा जी।

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  6. जी नमस्ते,

    आपकी लिखी रचना शुक्रवार १४ जून २०१९ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  7. मिटा सकते नहीं पन्नों से लेकिन
    दिलों से कुछ खरोंचे हैं मिटानी...बेहतरीन आदरणीय 👌
    सादगी भरा आप का यह अंदाज़ लाज़बाब है
    सादर

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  8. प्यारी सी रचना। बात सरलता से कही गई और दिल में उतरती हुई....

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  9. वाह बहुत उम्दा /बेहतरीन।
    कोमल सरस सुंदर अभिव्यक्ति

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  10. इस कविता में बहुत सी पुरानी चिठियां हैं, परफ्यूम हैं खुशबूएँ हैं. 👌

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    1. जी यही खुशबू ही तो जीवन है ...
      आभार आपका ...

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    2. आपकी हर रचना एक खूबसूरत अहसास है। बधाई और आभार।

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    3. बहुत आभार विश्वमोहन जी ...

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  11. यहाँ राधा है मीरा कृष्ण भी है
    यहाँ की शाम है कितनी सुहानी

    जहाँ प्रेम की बात हो वहाँ राधा व मीरा का जिक्र होना ही है, और जहाँ ये दोनों हों वहाँ कृष्ण अपने आप ही चले आते हैं..सुंदर भावों से सजी रचना

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    1. सच है ... कृष्ण तो हर प्रेम की जगह मौजूद हैं ... बहुत आभार आपका ...

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  12. हमेशा की तरह बेहतरीन लेखन हेतु साधुवाद आदरणीय ।
    वजह क्या है तेरी खुशबू की जाना
    कोई परफ्यूम या चिट्ठी पुरानी.....वाह!!!!!

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है ...