सोमवार, 12 अगस्त 2019

रोज़ प्रातः बोलते हैं विश्व का कल्याण हो ...

हम कहाँ कहते हैं केवल स्वयं का ही त्राण हो
रोज़ प्रातः बोलते हैं विश्व का कल्याण हो

है सनातन धर्म जिसकी भावना मरती नहीं
निज की सोचें ये हमारी संस्कृति कहती नहीं
हो गुरु बाणी के या फिर बुद्ध का निर्वाण हो  

राम को ही है चुनौती राम के ही देश में
शत्रु क्या घर में छुपा है मित्रता के वेश में?
राम मंदिर का पुनः उस भूमि पर निर्माण हो

मान खुद का ना रखा तो कौन पूछेगा हमें
हम नहीं जागे तो फिर इतिहास खोजेग हमें
दृष्टि चक्षू पर धनुरधर लक्ष्य पर ही बाण हो

कामना इतनी है बस मुझको प्रभू वरदान दे
सत्य पथ का मैं पथिक बन के चलूँ यह ज्ञान दे  
देश हित कुछ कर सकूँ काया तभी निष्प्राण हो 

38 टिप्‍पणियां:

  1. वाह
    कामना इतनी है बस मुझको प्रभू वरदान दे
    सत्य पथ का मैं पथिक बन के चलूँ यह ज्ञान दे
    देश हित कुछ कर सकूँ काया तभी निष्प्राण हो

    आमीन और साथ में सलाह भी आदतन

    हवा में देशहित की बात करने वालों को भी प्राप्त आप जैसा ज्ञान हो

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  2. कामना इतनी है बस मुझको प्रभू वरदान दे
    सत्य पथ का मैं पथिक बन के चलूँ यह ज्ञान दे
    देश हित कुछ कर सकूँ काया तभी निष्प्राण हो
    अनुपम...निज राष्ट्रभक्ति और मान के प्रति अत्यन्त पुनीत भावों का सृजन ।

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  3. हमारी संस्कृति ने हमेशा विश्व कल्याण की बात की है
    बेहतरीन प्रस्तुति दिगम्बर नवासा जी नमन

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  4. आज सलिल वर्मा जी ले कर आयें हैं ब्लॉग बुलेटिन की २५०० वीं बुलेटिन ... तो पढ़ना न भूलें ...

    ढाई हज़ारवीं ब्लॉग-बुलेटिन बनाम तीन सौ पैंसठ " , में आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  5. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (13-08-2019) को "खोया हुआ बसन्त" (चर्चा अंक- 3426) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. बहुत सुंदर उच्च भावों और पवित्र कामनाओं से भरी रचना।
    कामना इतनी है बस मुझको प्रभू वरदान दे
    सत्य पथ का मैं पथिक बन के चलूँ यह ज्ञान दे
    देश हित कुछ कर सकूँ काया तभी निष्प्राण हो

    अति उत्तम सृजन🙏🙏

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  7. रोज़ प्रातः बोलते हैं विश्व का कल्याण हो
    सर्वे भवन्तु सुखिनः के भावों से भरी बहुत ही उत्कृष्ट रचना....वाह!!!
    बहुत लाजवाब।

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  8. आदरणीय भ्राता,
    आपके पवित्र विचारों और कामनाओं की जय हो ।माॅ भारती का अनंत काल तक अपने आलौकिक रूप में विश्व वंदन हो।
    सादर नमन।

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  9. मान खुद का ना रखा तो कौन पूछेगा हमें
    हम नहीं जागे तो फिर इतिहास खोजेग हमें...
    बेहतरीन सृजन सर
    सादर

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  10. कामना इतनी है बस मुझको प्रभू वरदान दे
    सत्य पथ का मैं पथिक बन के चलूँ यह ज्ञान दे
    देश हित कुछ कर सकूँ काया तभी निष्प्राण हो
    बहुत बढ़िया कामना,दिग्सम्बर भाई।

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  11. कामना इतनी है बस मुझको प्रभू वरदान दे
    सत्य पथ का मैं पथिक बन के चलूँ यह ज्ञान दे
    सुन्दर और सच्ची बात कही है...बेहतरीन सृजन नवासा जी

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  12. कामना इतनी है बस मुझको प्रभू वरदान दे
    सत्य पथ का मैं पथिक बन के चलूँ यह ज्ञान दे
    देश हित कुछ कर सकूँ काया तभी निष्प्राण हो ...बहुत सुंदर रचना

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  13. सत्य का पथ ही अभीष्ट है. सुंदर कविता.

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  14. आपने बहुत अच्छा लेखा लिखा है, जिसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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  15. मान खुद का ना रखा तो कौन पूछेगा हमें
    हम नहीं जागे तो फिर इतिहास खोजेग हमें
    दृष्टि चक्षू पर धनुरधर लक्ष्य पर ही बाण हो...
    भावनाओं को उद्वेलित करती श्रेष्ठ कृति हेतु बधाई स्वीकार करें ।

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  16. राम को ही है चुनौती राम के ही देश में
    शत्रु क्या घर में छुपा है मित्रता के वेश में?
    राम मंदिर का पुनः उस भूमि पर निर्माण हो...हर भारतीय का एक सपना है ये और आशा करते हैं कि राम जी की कृपा , राम जी पर जरूर होगी !

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  17. अति उत्तम बेहतरीन रचना

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है ...