सोमवार, 30 सितंबर 2019

घर मेरा टूटा हुआ सन्दूक है ...


घर मेरा टूटा हुआ सन्दूक है

हर पुरानी चीज़ से अनुबन्ध है      
पर घड़ी से ख़ास ही सम्बन्ध है
रूई के तकिये, रज़ाई, चादरें    
खेस है जिसमें के माँ की गन्ध है
ताम्बे के बर्तन, कलेंडर, फोटुएँ
जंग लगी छर्रों की इक बन्दूक है
घर मेरा टूटा ...

"शैल्फ" पे  चुप सी कतारों में खड़ी   
अध्-पड़ी कुछ "बुक्स" कोनों से मुड़ी
पत्रिकाएँ और कुछ अख़बार भी
इन दराजों में करीने से जुड़ी  
मेज़ पर है पैन, पुरानी डायरी
गीत उलझे, नज़्म, टूटी हूक है
घर मेरा टूटा ....

ढेर है कपड़ों का मैला इस तरफ
चाय के झूठे हैं "मग" कुछ उस तरफ
फर्श पर है धूल, क्लीनिंग माँगती 
चप्पलों का ढेर रक्खूँ किस तरफ
जो भी है, कडुवा है, मीठा, क्या पता
ज़िन्दगी का सच यही दो-टूक है
घर मेरा टूटा ...

जो भी है जैसा भी है मेरा तो है
घर मेरा तो अब मेरी माशूक है 
घर मेरा टूटा ...

52 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में " सोमवार 30 सितम्बर 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में मंगलवार 01 अक्टूबर 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  3. कितनी यादें पिरोता हुआ आपका घर और लेखन भी

    जवाब देंहटाएं
  4. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (01-10-2019) को     "तपे पीड़ा  के पाँव"   (चर्चा अंक- 3475)  पर भी होगी। --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं
  5. सरल सहज सार्थक यथार्थ सब कुछ एक दृश्य सा आंखों से गुजर रहा है ।
    बहुत बहुत सुंदर सृजन नासवाजी ।
    अनुपम।

    जवाब देंहटाएं
  6. वाह अति सराहनीय.. बेहद लाज़़वाब अभिव्यक्ति सर।

    "शैल्फ" पे चुप सी कतारों में खड़ी
    अध्-पड़ी कुछ "बुक्स" कोनों से मुड़ी
    पत्रिकाएँ और कुछ अख़बार भी
    इन दराजों में करीने से जुड़ी
    मेज़ पर है पैन, पुरानी डायरी
    गीत उलझे, नज़्म, टूटी हूक है
    बहुत सुंदर लिखे हैं।

    जवाब देंहटाएं
  7. वाह!!दिगंबर जी ,क्या बात है ,जो भी हो ,जैसा भी हो ,मेरा तो है ..यही अहसास कितना सुखद होता है ...।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. जी यही एहसास जीवित रखता है ...
      बहुत आभार आपका ...

      हटाएं
  8. हर पुरानी चीज़ से अनुबन्ध है
    पर घड़ी से ख़ास ही सम्बन्ध है
    रूई के तकिये, रज़ाई, चादरें
    खेस है जिसमें के माँ की गन्ध है
    ताम्बे के बर्तन, कलेंडर, फोटुएँ
    जंग लगी छर्रों की इक बन्दूक है
    घर मेरा टूटा ..... मर्म का मोहक एहसास करती सुन्दर कृति |बहतरीन सृजन यादों के मोती पिरोए हुये |
    सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. जो भी है जैसा भी है मेरा तो है
      घर मेरा तो अब मेरी माशूक है
      दिगम्बर भाई,बहुत सुंदर रचना। अपना घर अपना ही होता हैं। सच्चा सकून सिर्फ वहीं मिलता हैं।

      हटाएं
    2. सच कहा है अपने ज्योति जी ...
      अपने घर की अलग बात है ... बहुत आभार आपका ...

      हटाएं
  9. नर्म अहसासों को समेटती बहुत सुंदर रचना..

    जवाब देंहटाएं
  10. माशूक से जिस तरह मोहब्बत होती है उसी तरह से अपने घर से भी होती है।
    लाजवाब।

    जवाब देंहटाएं
  11. जब टूटे संदूक में माँ की गंध के साथ इतनी सारी यादेंं समायी हों तो सच में ये संदूक अपने लिए पूरा घर सा बन जायेगा ....
    जो भी है जैसा भी है मेरा तो है
    घर मेरा तो अब मेरी माशूक है
    घर मेरा टूटा ...
    वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर मनभावनी लाजवाब प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  12. जो भी है, कडुवा है, मीठा, क्या पता
    ज़िन्दगी का सच यही दो-टूक है, - कड़वा-मीठा जो भी है ,बहुत अपना है क्योंकि -
    इसकी हर पुरानी चीज़ से मन का अनुबन्ध है.
    इस के बिना तो जीना ही यन्त्रवत् रह जाएगा.
    सराहनीय अभिव्यक्ति!

    जवाब देंहटाएं
  13. Great and very informative post. Thanks for putting in the effort to write it. For readers who are interested in Career information. You can use LifePage to explore more than a thousand Career Options. Real IAS officers, real Lawyers, real Businessmen, real CAs, real Actors ... explain what is required for success in their profession. These Videos are available for free on the LifePage App: https://www.lifepage.in/app.php

    जवाब देंहटाएं
  14. वाह! बहुत सुंदर प्रस्तुति सर जी।

    जवाब देंहटाएं
  15. घर तो घर ही होता है और ऐसा ही होता है. सुदर चित्रण.

    जवाब देंहटाएं
  16. कितना भी पुराना हो, कितना भी दिल के करीब हो, एक दिन तो सब कुछ छूट ही जाने वाला है..घर घर की यही कहानी है..

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. जी ये सच है ... पर यादों पे किसी का बस कहाँ ...
      बहुत आभार आपका ...

      हटाएं
  17. रूई के तकिये, रज़ाई, चादरें
    खेस है जिसमें के माँ की गन्ध है

    बहुत ही भावपूर्ण रचना और सरल शब्दों में।
    ये सन्दूक ही खज़ाना हैं।मुझे याद है मेरे एक अज़ीज़ दोस्त के पिता जब दो पेग में थोड़ा रोमानी हो जाते थे तो पुराने बास्ते ने निकाल कर अपने पापा के लेटर्स पड़ते थे।
    आभार
    आभार

    जवाब देंहटाएं
  18. ढेर है कपड़ों का मैला इस तरफ
    चाय के झूठे हैं "मग" कुछ उस तरफ
    फर्श पर है धूल, क्लीनिंग माँगती
    चप्पलों का ढेर रक्खूँ किस तरफ
    जो भी है, कडुवा है, मीठा, क्या पता
    ज़िन्दगी का सच यही दो-टूक है
    घर मेरा टूटा ... अपना घर कैसा भी हो अच्छा लगता है !! भावनाओं की सुन्दर अभिव्यक्ति है शब्दों में

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. जी अपने घर की बात ही अलग है ...
      बहुत अबह्र योगी जी ...

      हटाएं
  19. सुनहरे यादें मन में घर किए हों तो फिर उससे प्यार होना लाज़मी है। अपनों की यादें कब बरसें कोई नहीं जानता
    \बहुत प्यारी प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  20. Really Appreciated . You have noice collection of content and veru meaningful and useful. Thanks for sharing such nice thing with us. love from Status in Hindi

    जवाब देंहटाएं
  21. Really Appreciated . You have noice collection of content and veru meaningful and useful. Thanks for sharing such nice thing with us. love from Status in Hindi

    जवाब देंहटाएं
  22. "शैल्फ" पे चुप सी कतारों में खड़ी
    अध्-पड़ी कुछ "बुक्स" कोनों से मुड़ी
    पत्रिकाएँ और कुछ अख़बार भी
    इन दराजों में करीने से जुड़ी
    मेज़ पर है पैन, पुरानी डायरी
    गीत उलझे, नज़्म, टूटी हूक है
    क्या बात कही....सम्पूर्ण सार को इन संक्षिप्त शब्दों में आपने रख दिया है...

    अतिसुन्दर रचना....

    जवाब देंहटाएं
  23. वाह! घर के एक पहचान ये भी!

    जवाब देंहटाएं

आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है ...