सोमवार, 23 मार्च 2020

यूँ ही ... एक ख़ुशबू ...

हालाँकि छूट गया था शहर 
छूट जाती है जैसे उम्र समय के साथ 
टूट गया वो पुल 
उम्मीद रहती थी जहाँ से लौट आने की 
पर एक ख़ुशबू है, भरी रहती है जो नासों में 
बिना खिंचेबिना सूंघे 

लगता है खिलने लगा है आस-पास 
जंगली गुलाब का फूल कोई 

या ... गुजरी हो तुम इस रास्ते से कभी 

वैसे मनाही तुम्हारी याद को भी नहीं 
उठा लाती है जो तुम्हें 
जंगली गुलाब की ख़ुशबू लपेटे 

#जंगली_गुलाब 

44 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (24 -3-2020 ) को " तब तुम लापरवाह नहीं थे " (चर्चा अंक -3650) पर भी होगी,
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    ---
    कामिनी सिन्हा

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  2. उफ्फ जंगली गुलाब की खुशबू | कहर ढाते रहिये

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    1. जी आप भी महकते रहें ... अच्छा लगा आपने मिलना उस दिन

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  3. "वैसे मनाही तुम्हारी याद को भी नहीं
    उठा लाती है जो तुम्हें
    जंगली गुलाब की ख़ुशबू लपेटे"

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  4. बेहतरीन ख्याल और लाजवाब अंदाज । अनुभव व संजीदगी से भरी इस रचना की कितनी भी तारीफ़ करें कम होगी।
    अनंत शुभकामनाएँ आदरणीय ।

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  5. जंगली गुलाब प्रकृति की सुंदर देंन है. जहाँ मनुष्य ने गुलाब के साथ इतने प्रयोग किये हैं कि रंग और ख़ुशबू को लेकर हम भ्रमित हो जाते हैं वहीं जंगली गुलाब में नैसर्गिक सौंदर्य अभी भी विद्यमान है.
    बहुत सुंदर रचना आदरणीय सर

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    1. आपकी विस्तृत टिप्पणी ने मोह लिया ... बहुत आभार

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  6. या ... गुजरी हो तुम इस रास्ते से कभी
    क्या खूब.
    बहुत बढ़िया सृजन 👏 👏

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  7. यादों को कौन कब रोक सका है, यादें गुलाबों की हों या काँटों की... भरम में जिए जाना इंसान की नियति है..

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  8. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (25-03-2020) को    "नव संवत्सर-2077 की बधाई हो"   (चर्चा अंक -3651)     पर भी होगी। 
     -- 
    मित्रों!
    आजकल ब्लॉगों का संक्रमणकाल चल रहा है। ऐसे में चर्चा मंच विगत दस वर्षों से अपने चर्चा धर्म को निभा रहा है।
    आप अन्य सामाजिक साइटों के अतिरिक्त दिल खोलकर दूसरों के ब्लॉगों पर भी अपनी टिप्पणी दीजिए। जिससे कि ब्लॉगों को जीवित रखा जा सके।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 

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  9. लगता है खिलने लगा है आस-पास
    जंगली गुलाब का फूल कोई

    या ... गुजरी हो तुम इस रास्ते से कभी
    बहुत सुंदर रचना, दिगंबर भाई।

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  10. लगता है खिलने लगा है आस-पास
    जंगली गुलाब का फूल कोई

    या ... गुजरी हो तुम इस रास्ते से कभी
    यहीं ख्याल तो जीजिविषा है जीवन की...पंक्तियों में कभी मन की आशाएं जंगली गुलाब के रूप में खिलती हैं तो कभी जीवन के राग के रूप में...., बेहद खूबसूरत भावाभिव्यक्ति.

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  11. अनायास ही चली आए जैसे नासापुटों में खिलते गुलाब की गंध,मन में समान अनुभूतियों का स्फुरण करती हुई ..सुन्दर भाव!

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  12. जंगली गुलब की खुशबू....वाह वाह वाह....

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  13. ""जंगली_गुलाब "" ये शब्द पढ़ कर ही मन रचना की और आकर्षित हो गया था। जिहोने जंगली गुलाब का आकर्षण समझा हो वो ही ऐसी सोच उकेर सकते हैं

    वैसे मनाही तुम्हारी याद को भी नहीं
    उठा लाती है जो तुम्हें
    जंगली गुलाब की ख़ुशबू लपेटे

    जंगली गुलाब की मोहकता समेटे बहुत मोहक रचना

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    1. जी जंगली गुलाब अक्सर मेरी रचनाओं की अनाम नायिका है ... बहुत आभार आपका ...

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  14. बहुत बढ़िया। जंगली गुलाब शब्द पहली बार सुना।

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    1. ये जंगली गुलाब अक्सर मेरी रचनाओं की अनाम नायिका रही है ...
      बहुत आभार आपका ...

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है