सोमवार, 1 जून 2020

सपने आँखों में


किसी की आँखों में झाँकना
उसके दर्द को खींच निकालना नहीं होता 
ना ही होता है उसके मन की बात
लफ्ज़-दर-लफ्ज़ पढ़ना

उसकी गहरी नीली आँखों में
प्रेम ढूँढना तो बिलकुल भी नहीं होता  

हाँ ... होते हैं कुछ अधूरे सपने उन आँखों में
देखना चाहता हूँ जिन्हें
समेटना चाहता हूँ जिनको
करना चाहता हूँ दुआ जिनके पूरे होने की

सपनों का टूट जाना
ज़िन्दगी के छिज जाने से कम नहीं ...

समेटन चाहता हूँ साँस लेती पँखुरी-पँखुरी
चाहता हूँ खिल उठे जंगली गुलाब ...

#जंगली_गुलाब 

56 टिप्‍पणियां:

  1. सपनों का टूट जाना
    ज़िन्दगी के छिज जाने से कम नहीं ...बहुत सही!!!

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  2. ये कातिल जंंगली गुलाब कुछ कर बैठेंगे किसी दिन :) लाजवाब।

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  3. बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति सर।

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  4. किसी की आँखों में झाँकना
    उसके दर्द को खींच निकालना नहीं होता....
    सच में !!!

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  5. सच बिना सपनों के जिंदगी -जिंदगी नहीं रहती, ये अलग बात है कि हर सपना साकार हो, लेकिन यह सोच चुप बैठना कम दु:खदायी नहीं है
    बहुत अच्छी प्रस्तुति

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    1. सच कहा है

      बहुत आभार आदरणीय कविता जी ... 🙏🙏🙏

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  6. किसी के सपनों को पूरा होते हुए देखने की चाहत बहुत नेक है, किसी के दुःख मिटाना संभव नहीं, हर एक को अपना दुःख स्वयं ही मिटाना होता है

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    1. जी बिलकुल ...

      बहुत आभार आदरणीय अनीता जी ... 🙏🙏🙏

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  7. वाह!लाजवाब सृजन आदरणीय सर.
    सादर

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  8. वाह, बहुत सुन्दर...

    समेटन चाहता हूँ साँस लेती पँखुरी-पँखुरी
    चाहता हूँ खिल उठे जंगली गुलाब ...

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  9. सपनों का टूट जाना
    ज़िन्दगी के छिज जाने से कम नहीं ...

    समेटन चाहता हूँ साँस लेती पँखुरी-पँखुरी
    चाहता हूँ खिल उठे जंगली गुलाब ...
    खुबसूरत रचना

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  10. सपनों का टूट जाना
    ज़िन्दगी के छिज जाने से कम नहीं ...
    क्या बात है ,बहुत ही सुंदर रचना और सत्य भी

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  11. सपनों का टूट जाना
    ज़िन्दगी के छिज जाने से कम नहीं ...

    इन दो पंक्तिओं में पूरी कविता समाई है .....वाह

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  12. समेटन चाहता हूँ साँस लेती पँखुरी-पँखुरी
    चाहता हूँ खिल उठे जंगली गुलाब ...
    सुन्दर अभिव्यक्ति !

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  13. हाँ ... होते हैं कुछ अधूरे सपने उन आँखों में
    देखना चाहता हूँ जिन्हें
    समेटना चाहता हूँ जिनको
    करना चाहता हूँ दुआ जिनके पूरे होने की..
    बहुत खूब !! स्वप्निल संसार अपने आप अद्भुत होता है ।खूबसूरत अभिव्यक्ति ।

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  14. चाहता हूँ खिल उठे जंगली गुलाब ...
    बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति

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  15. सपने के बिना खिलेगा कैसे अपना प्यारा जंगली गुलाब...होनी ही चाहिए साँस लेती पंखुड़ियों को समेटने की कोशिशें और बनी रहनी चाहिए इनमें मधुर सपने देखने की चाहते.... तभी तो खुशबू से महकता है जंगली गुलाब और ब्लॉग स्वप्न मेरे...
    हमेशा की तरह बहुत ही लाजवाब सृजन।

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  16. केसरिया रंग में रंगा सपना छन छन कर अंग सहरा रहा है ।

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  17. ना ही होता है उसके मन की बात
    लफ्ज़-दर-लफ्ज़ पढ़ना
    लाजवाब सृजन

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  18. सपनों का टूट जाना
    ज़िन्दगी के छिज जाने से कम नहीं ...

    बहुत खूबसूरत...👌👌

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  19. किसी की आँखों के सपने तलाशना और उन्हें पूरा करने की चाह रखना ,गुलाब खिलाने की लालसा ..यह सब किसी के दर्द को खींच लेने और प्रेम तलाशने का ही तो दूसरा नाम है . क्या लिख देते हैं आप भी ...

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  20. सपने तो प्रेम की परीक्षा लेते हैं. टूटने भला कैसे देंगे।

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  21. सपनों का टूट जाना
    ज़िन्दगी के छिज जाने से कम नहीं ...बहुत ही गहरी बात लिखी है आपने 

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