सोमवार, 10 अगस्त 2020

हाथ खेतों की धान होते हैं

वो जो कड़वी ज़ुबान होते हैं, 
एक तन्हा मचान होते हैं.


चुप ही रहने में है समझदारी, 
कुछ किवाड़ों में कान होते हैं.

एक दो, तीन चार, बस भी करो, 
लोग चूने का पान होते हैं.

उम्र है लोन, सूद हैं सासें, 
अन्न-दाता, किसान होते हैं.

गोलियाँ, गालियाँ, खड़े तन कर,
फौज के ही जवान होते हैं. 
 
जो नहीं हैं रियाज़ के आदी,
एक टूटी सी तान होते हैं.
 
रख दिए साहूकार पे गिरवी,
हाथ खेतों की धान होते हैं.

53 टिप्‍पणियां:

  1. जो नहीं हैं रियाज़ के आदी
    एक टूटी सी तान होते हैं
    बहुत ख़ूब।

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    1. बहुत दिनों बाद आपको देखा ब्लॉग पर ...
      अच्छा लगा ... आपका आभार यहाँ तक आने का ...

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  2. वो जो कड़वी ज़ुबान होते हैं,
    एक तन्हा मचान होते हैं.
    वाह !! लाजवाब सृजन.

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  3. वो जो कड़वी ज़ुबान होते हैं,
    एक तन्हा मचान होते हैं.......
    आदरणीय नसवा जी, आपकी रचनाओं का मिजाज ही अलग होता है, न जाने किधर बहा ले जाता है हमें। बिल्कुल आत्मविभोर होकर मुक्तश्वास पढता ही चला जाता हूँ । एक ताजगी है जिसके अनछुए एहसास में बंध सा जाता हूँ ।
    बस, ऐसे ही आत्मविभोर करते रहें हमें।
    शुभकामनाएँ .....

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (12-08-2020) को "श्री कृष्ण जन्माष्टमी-आ जाओ गोपाल"   (चर्चा अंक-3791)   पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    योगिराज श्री कृष्ण जन्माष्टमी  की 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  
    --

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  5. उम्र है लोन, सूद हैं सासें,
    अन्न-दाता, किसान होते हैं.
    वाह !!लाज़बाब सृजन ,सादर नमस्कार

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  6. उम्र है लोन, सूद हैं सासें,
    अन्न-दाता, किसान होते हैं.

    गोलियाँ, गालियाँ, खड़े तन कर,
    फौज के ही जवान होते हैं.

    जय जवान जय किसान...
    हमेशा की तरह बहुत ही लाजवाब सृजन
    वाह!!!

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  7. बहुत उम्दा पंक्तियां दिगंबर जी

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  8. उम्र है लोन, सूद हैं सासें,
    अन्न-दाता, किसान होते हैं.
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।

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  9. वाह !
    जो नहीं हैं रियाज़ के आदी,
    एक टूटी सी तान होते हैं.
    जीवन के विविध रंग-रूप का दर्शन कराती सुंदर रचना ...

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  10. शानदार रचना । मेरे ब्लॉग पर आप का स्वागत है ।

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  11. वाह!सराहना से परे ..
    लाजवाब 👌

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  12. हाथ खेतों की धान होते हैं...शानदार रचना

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  13. वो जो कड़वी ज़ुबान होते हैं,
    एक तन्हा मचान होते हैं.,,,,,,,,,सच बात है सच बोलने के बाद इंसान तनहा ही रह जाता है बहुत ही बेहतरीन रचना ।

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  14. एक से बढ़ कर एक - गागर में सागर जैसे .

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    1. बहुत आभार आपका ...
      स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई ...

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  15. बहुत उम्दा और भावपूर्ण। दाद स्वीकारें।

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    1. बहुत आभार आपका ...
      स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई ...

      हटाएं
  16. कृपया इस लिंक पर अवश्य पधारे इसमें आप भी शामिल हैं -
    https://ghazalyatra.blogspot.com/2020/08/blog-post_14.html?m=0

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    1. बहुत आभार आपका ...
      स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई ...

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  17. बेहतरीन रचना । स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ।

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    1. बहुत आभार आपका ...
      स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई ...

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  18. Hi Dear

    Thanks for sharing this premium knowledge for free of cost thanks

    thanks
    dude

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  19. उम्र है लोन, सूद हैं सासें,
    अन्न-दाता, किसान होते हैं.
    गोलियाँ, गालियाँ, खड़े तन कर,
    फौज के ही जवान होते हैं.
    जवान और किसान दोनों के लिए बहुत कुछ लिख दिया आपने दिगम्बर जी | इतने सालों से ग़ज़ल लिखते हुए कहीं भी बोझिलता नहीं अनुभव होती पाठकों को | हर शेर की अपनी दास्तान है | भावपूर्ण रचना के लिए आभार और बधाई |

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    1. बहुत दिनों बाद आपको देख के अच्छा लगा ब्लॉग पर ... आपकी thoughtful टिप्पणी हमेशा प्रेरित करती हैं ... बहुत आभार आपका ...

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  20. उम्र है लोन, सूद हैं सासें,
    अन्न-दाता, किसान होते हैं.

    वाह क्या बात है.

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  21. एक दो, तीन चार, बस भी करो,
    लोग चूने का पान होते हैं...लोग चूने का पान होते हैं ? मतलब चूना लगा के चमकने वाले हाहाहा .....बेहतरीन शब्द लिखे हैं सर 

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है