सोमवार, 31 अगस्त 2020

तेरा जाना ट्रिगर है यादों का बंधन

सिक्कों का कुछ चाँद सितारों का बंधन.
चुम्बक है पर तेरी बाहों का बंधन.
 
दिन में भी तो चाँद नज़र आ जाता है,
इसने कब माना है रातों का बंधन.
 
तेरी आहट जैसे ही दरवाज़े पर,
खोल दिया बादल ने बूंदों का बंधन.
 
जो करना है अभी करो, बस अभी करो,
किसने जाना कब तक साँसों का बंधन.
 
तुमसे रौनक, तुमसे रोटी, सब्जी, दाल,
वरना ये घर चार दीवारों का बंधन.
 
सूरज की दस्तक को कब तक ठुकराते,
टूट गया सपनों की बातों का बंधन.

कब तक तेरा साथ, वक़्त का पता नहीं,
तेरा जाना ट्रिगर है यादों का बंधन.

19 टिप्‍पणियां:

  1. हर बार की तरह एक नई सोच..एक अपने ही अन्दाज़ में अलग सी भावाभिव्यक्ति..लाजवाब !!

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  2. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (01 -9 -2020 ) को "शासन को चलाती है सुरा" (चर्चा अंक 3810) पर भी होगी,आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    ---
    कामिनी सिन्हा

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  3. तेरी आहट जैसे ही दरवाज़े पर,
    खोल दिया बादल ने बूंदों का बंधन.
    वाह!!!!
    तुमसे रौनक, तुमसे रोटी, सब्जी, दाल,
    वरना ये घर चार दीवारों का बंधन.
    बहुत ही खूबसूरत यादों का बंधन....
    हमेशा की तरह उत्कृष्ट एवं लाजवाब सृजन।

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  4. कब तक तेरा साथ, वक़्त का पता नहीं,
    तेरा जाना ट्रिगर है यादों का बंधन.,,,,,,बाह क्या बात है सर बिलकुल अलहदा अंनदाज,बहुत सुंदर ।

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  5. वाहह..
    शायरी में ट्रीगर शब्द का उपयोग.. अलग ही बानगी है हर शेर की।
    बहुत बढ़ियाँ।

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  6. कब तक तेरा साथ, वक़्त का पता नहीं,
    तेरा जाना ट्रिगर है यादों का बंधन.
    बहुत खूब!

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  7. जो करना है अभी करो, बस अभी करो,
    किसने जाना कब तक साँसों का बंधन.
    वाह !! बहुत खूब, सादर नमस्कार आपको

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  8. नमस्कार नासवा जी, सूरज की दस्तक को कब तक ठुकराते,
    टूट गया सपनों की बातों का बंधन.
    कब तक तेरा साथ, वक़्त का पता नहीं,
    तेरा जाना ट्रिगर है यादों का बंधन....लाजवाब हैंं नज़्म में प‍िरोई... ''यादें ''

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  9. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 2 सितंबर 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  10. रोटी सब्ज़ी वाला शेर बहुत कमाल। सुन्दर ग़ज़ल।

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  11. तेरी आहट जैसे ही दरवाज़े पर,
    खोल दिया बादल ने बूंदों का बंधन.वाह बेहतरीन ग़ज़ल आदरणीय।

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  12. किसे कहें लाजबाब अशआर...
    बेमिसाल ग़ज़ल

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  13. चुंबक तो आपके हर अंदाज में है .

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है