बुधवार, 24 फ़रवरी 2021

हम नई कहानी सबको पेलते रहे ...

लोग तो चले गए मगर पते रहे.
याद के बुझे से तार छेड़ते रहे.  
 
जल गया मकान हाथ सेकते रहे.
सब तमाशबीन बन के देखते रहे.
 
इस तरफ तो कर दिया इलाज़ दर्द का,
और घाव उस तरफ कुरेदते रहे.
  
फर्श पे गिरे हैं अर्श से जो झूठ के,
ख़्वाब इतने साल हमें बेचते रहे.
 
हार तय थी दिल नहीं था मानता मगर.
उनकी इक नज़र पे दाव खेलते रहे.
 
चिंदी चिंदी खत हवा के नाम कर दिया,
इस तरह से दिल वो मेरा छेड़ते रहे.
 
वो गए तो सबने पूछा माज़रा है क्या,
हम नई कहानी सबको पेलते रहे.

27 टिप्‍पणियां:

  1. वाह!दिगंबर जी ,क्या बात है !
    वो गए तो सबने पूछा ,माजरा है क्या ?
    हम नई कहानी सबको पेलते रहे ।
    वाह!

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  2. हार तय थी दिल नहीं था मानता मगर.
    उनकी इक नज़र पे दाव खेलते रहे.

    सुन्दर.... गजल

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  3. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" ( 2050...क्योंकि वह अपनी प्रजा को खा जाता है... ) पर गुरुवार 25 फ़रवरी 2021 को साझा की गयी है.... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. इस तरफ तो कर दिया इलाज दर्द का ,और उस तरफ घाव कुरेदते रहे ...वाह .

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  5. हार तय थी दिल नहीं था मानता मगर.
    उनकी इक नज़र पे दाव खेलते रहे.
    यही है दीवानगी की इंतहा!!!।
    लाजवाब शेर हर बार की तरह। हार्दिक शुभकामनाएं 💐💐🙏💐💐

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  6. चिंदी चिंदी खत हवा के नाम कर दिया,
    इस तरह से दिल वो मेरा छेड़ते रहे.👌👌👌👌👌👌

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  7. वो गए तो सबने पूछा माज़रा है क्या,
    हम नई कहानी सबको पेलते रहे.

    बहुत ख़ूब.

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  8. हर शेर कुछ न कुछ कह रहा.. लाजवाब ग़ज़ल..

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  9. जिंदगी का एक नया फलसफा बयान करती बेहतरीन गजल

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  10. जल गया मकान हाथ सेकते रहे.
    सब तमाशबीन बन के देखते रहे.

    बहुत खूब,सादर नमन आपको

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  11. इधर भी उधर भीं बहुत चलता है
    जो खूब खलता है

    हर बार की तरह बहुत लाजवाब

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  12. चिंदी चिंदी खत हवा के नाम कर दिया,
    इस तरह से दिल वो मेरा छेड़ते रहे.

    क्या बात है ! बहुत खूबसूरत ग़ज़ल ।

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  13. फर्श पे गिरे हैं अर्श से जो झूठ के,
    ख़्वाब इतने साल हमें बेचते रहे.वाहहह बेहतरीन ग़ज़ल आदरणीय।

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  14. खूबसूरत ग़ज़ल अच्छे अंदाज में लिखी गयी |

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  15. किसी एक अशआर की तारीफ करना बेमानी होगा।  पूरी की पूरी गजल बहुत ही जबरदस्त अंदाज़ में लिखी है और हर शेर बेहतरीन बन पड़ा है 

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  16. इस तरफ तो कर दिया इलाज़ दर्द का,
    और घाव उस तरफ कुरेदते रहे.
    वाह!!!
    क्या बात...
    बहुत ही लाजवाब।

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है