गुरुवार, 3 जून 2021

तीरगी की आड़ ले कर रौशनी छुपती रही ...

इक पुरानी याद दिल से मुद्दतों लिपटी रही.
घर, मेरा आँगन, गली, बस्ती मेरी महकी रही.
 
कुछ उजाले शाम होते ही लिपटने आ गए,
रात भर ये रात छज्जे पर मेरे अटकी रही.
 
लौट कर आये नहीं कुछ पैर आँगन में मेरे,
इक उदासी घर के पीपल से मेरे लटकी रही.
 
उनकी आँखों के इशारे पर सभी मोहरे हिले,
जीत का सेहरा भी उनका हार भी उनकी रही.
 
चाँद का ऐसा जुनूं इस रात को ऐसा चढ़ा,
रात सोई फिर उठी फिर रात भर उठती रही.
 
रौशनी के चोर चोरी रात में करने चले,
तीरगी की आड़ ले कर रौशनी छुपती रही.

23 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार( 04-06-2021) को "मौन प्रभाती" (चर्चा अंक- 4086) पर होगी। चर्चा में आप सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद.


    "मीना भारद्वाज"

    जवाब देंहटाएं
  2. इक पुरानी याद दिल से मुद्दतों लिपटी रही.
    घर, मेरा आँगन, गली, बस्ती मेरी महकी रही.
    सुन्दर रचना

    जवाब देंहटाएं
  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  4. लौट कर आये नहीं कुछ पैर आँगन में मेरे,
    इक उदासी घर के पीपल से मेरे लटकी रही.
    ..मार्मिक चित्रण, भावों भरा चित्रण ।

    जवाब देंहटाएं
  5. उनकी आँखों के इशारे पर सभी मोहरे हिले,
    जीत का सेहरा भी उनका हार भी उनकी रही.

    चाँद का ऐसा जुनूं इस रात को ऐसा चढ़ा,
    रात सोई फिर उठी फिर रात भर उठती रही.---सुंदर सृजन...।

    जवाब देंहटाएं
  6. क्या खूसूरत ग़ज़ल लिखी है आपने। दिल बाग़-बाग़ हो गया.

    जवाब देंहटाएं
  7. रौशनी के चोर चोरी रात में करने चले,
    तीरगी की आड़ ले कर रौशनी छुपती रही
    यही तो हो रहा है, सत्य को असत्य के पीछे छुपना पड़ रहा है, क्योंकि सत्य जब ग़लत हाथों में पड़ जाता है तो उसका दुरुपयोग ही होता है। बेहतरीन ग़ज़ल

    जवाब देंहटाएं
  8. उनकी आँखों के इशारे पर सभी मोहरे हिले,
    जीत का सेहरा भी उनका हार भी उनकी रही
    बहुत बढ़िया !!समर्पण का अद्भुत भाव !!

    जवाब देंहटाएं
  9. रौशनी के चोर चोरी रात में करने चले,
    तीरगी की आड़ ले कर रौशनी छुपती रही.

    बहुत खूब,दो पंक्तियों में आप दुनिया समेट लेते हैं,लाज़बाब सृजन आदरणीय दिगंबर जी,सादर नमन आपको

    जवाब देंहटाएं
  10. बहुत बहुत सुन्दर सराहनीय बढ़िया गजल |

    जवाब देंहटाएं
  11. एक ही शब्द फिर से कि 'हर बार की तरह लाजवाब'प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  12. बहुत उम्दा ग़ज़ल. यह शेर लाजवाब...
    लौट कर आये नहीं कुछ पैर आँगन में मेरे,
    इक उदासी घर के पीपल से मेरे लटकी रही.

    जवाब देंहटाएं
  13. रात भर ये रात छज्जे पर मेरे अटकी रही.
    गजब चित्रण किया है, आभार इतना अच्छा पढ़ाने के लिये।

    जवाब देंहटाएं
  14. चाँद का ऐसा जुनूं इस रात को ऐसा चढ़ा,
    रात सोई फिर उठी फिर रात भर उठती रही.

    बहुत उम्दा गजल...

    जवाब देंहटाएं
  15. आपका तो अंदाज़े बयां ही अलहदा है सर जी। बेहतरीन , सब एक से बढ़ कर एक। हमेशा की तरह शानदार

    जवाब देंहटाएं
  16. रात भर बैरन निगोड़ी चाँदनी चुभती रही...तीरगी की आड़ ले कर रौशनी छुपती रही...हमेशा की तरह...आपका कायल बनाती एक ग़ज़ल...

    जवाब देंहटाएं
  17. वा!!! मी महाराष्ट्रातून आहे. आपला मराठी ब्लॉग पहिल्यांदाच पाहिला. कविता खूप आवडली.

    Instagram marathi status
    vishwas marathi status
    dadagiri status in Marthi
    wedding anniversary wishes in marathi
    motivational quotes in marathi

    जवाब देंहटाएं
  18. ...
    चाँद का ऐसा जुनूं इस रात को ऐसा चढ़ा,
    रात सोई फिर उठी फिर रात भर उठती रही.
    ..."
    ........माननीय वाकई बहुत ही बेहतीरन है। आह! और वाह! दोनो है। अर्थात् पढकर मन को सुकून भी मिला और भावुक भी हुआ। सुन्दर रचना।

    जवाब देंहटाएं

आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है