शनिवार, 6 अगस्त 2022

फ़लसफा - लम्बी उम्र का ...

माँगता है इन्सान दुआ लम्बी उम्र की 
पर नहीं समझ पाता कौन सी उम्र  
 
ढल जाता है बचपन नासमझी में
बीत जाती है जवानी तय शुदा साँसों में
 
हाँ ... मिलती है लम्बी उम्र    
जो आती है सिर्फ बुढापे के हिस्से
उम्र के एक ऐसे पक्ष में जहाँ दर्द के सिवा कुछ नहीं होता
डर रोज़ का हिस्सा होता है
अकेलेपन का एहसास गहरे अँधेरे सा फैलता है जहाँ
 
काश की लम्बी उम्र से ज्यादा अच्छी उम्र की दुआ होती
न होता तो बचपन लम्बा हो जाता या जवानी की राह ख़त्म न होती
 
काश की लम्बी उम्र की दुआओं के बाद
आमीन बोलने से पहले कोई तो समझाता ... लम्हों का घटा जोड़
किसको पता होता है लम्बी उम्र की दुआ आती है बुढापे के हिस्से

16 टिप्‍पणियां:

  1. काश ! अच्छी उम्र की दुआ हो । गहन चिंतन ।

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  2. आपकी लिखी रचना सोमवार 08 अगस्त 2022 को
    पांच लिंकों का आनंद पर... साझा की गई है
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    संगीता स्वरूप

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  3. लंबी उम्र बुढापे के हिस्से आती है..बहुत खूब।

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  4. वाह! सही कहा आपने काश की बचपन और तरुणाई के लम्बे होने का कोई अलग फ़लसफ़ा होता।
    अप्रतिम।

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  5. कोई सौ साल में भी एवरेस्ट पर चढ़ने की हिम्मत रखता है, कोई सौ से ऊपर वाला भी पुस्तक लिख लेता है, बचपन कभी साथ नहीं छोड़ता और युवावस्था दिलवालों की आख़िरी श्वास तक बनी रहती है

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  6. सटीक चिंतन,सुंदर शब्द विन्यास से गूँथी विचारणीय अभिव्यक्ति सर।
    सादर।

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  7. बेहतरीन भावपूर्ण सृजन

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  8. बात तो ठीक है कैसी और कौन सी लंबी उम्र।

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  9. ओह! सच में लम्बी उम्र की दुआ बुढ़ापे के हिस्से में आती है! यही जीवन का कडवा सच है। बहुत ही मर्मांतक लिखा है आपने दिगम्बर जी ।आजकल उम्र दराज लोगों की व्यथा सुनकर यही प्रश्न मन में आते हैं 🙁🙏🙏

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  10. यह तो बहुत बड़ा सच कहा ,लंबी उम्र की दुआ उस वक्त बहुत ही बोझिल लगती है जब हम दूसरों के सहारे पर होते हैं।

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  11. काश की लम्बी उम्र से ज्यादा अच्छी उम्र की दुआ होती
    न होता तो बचपन लम्बा हो जाता या जवानी की राह ख़त्म न होती
    ... एकदम सही बात .

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  12. बहुत सही कहा . बचपन पलक झपकते बीतत जाता है . युवावय भी राग विराग संघर्ष आदि में पता ही नहीं चल पाता . जीवन का अन्तिम दौर सचमुच लम्बा और बोझिल लगता है क्योंकि लोग उसका जाने अनजाने एहसास कराते ही हैं .

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