शिखर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शिखर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 26 अगस्त 2019

क्या मिला सचमुच शिखर ...


क्या मिला सचमुच शिखर ?

मिल गए ऐश्वर्य कितने अनगिनत
पञ्च-तारा जिंदगी में हो गया विस्मृत विगत
घर गली फिर गाँव फिर छूटा नगर
क्या मिला सचमुच ...

कर्म पथ पर आ नहीं पाई विफलता
मान आदर पदक लाई सब सफलता
मित्र बिछड़े चल न पाए साथ अपने इस डगर
क्या मिला सचमुच ...

एकला चलता रहा शुभ लक्ष्य पाया
चक्र किन्तु नियति ने ऐसा घुमाया
ले गई किस छोर पे जाने उठाकर ये लहर
क्या मिला सचमुच ...

उम्र के इस मोड़ पर ना साथ कोई
सोचता हूँ फसल ये कैसी है बोई
खो गया वो रास्ता, जाता था जो मेरे शहर 
क्या मिला सचमुच ...

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

बचा कर के टांगें निकलना पड़ेगा ...

नया वर्ष आने वाला है ... सभी मित्रों को २०१८ की बहुत बहुत शुभकामनाएं ... २०१७ की अच्छी यादों के साथ २०१८ का स्वागत है ... 

ये किरदार अपना बदलना पड़ेगा
जो जैसा है वैसा ही बनना पड़ेगा

ये जद्दोजहद ज़िन्दगी की कठिन है
यहाँ अपने लोगों को डसना पड़ेगा

बहुत भीड़ है रास्तों पर शिखर के
किसी को गिरा कर के चलना पड़ेगा

कभी बाप कहना पड़ेगा गधे को
कभी पीठ पर उसकी चढ़ना पड़ेगा

अलहदा जो दिखना है इस झुण्ड में तो  
नया रोज़ कुछ तुमको करना पड़ेगा

यहाँ खींच लेते हैं अपने ही अकसर 
बचा कर के टांगें निकलना पड़ेगा